Jhansi ki Rani - Lakshmibai # 29 - Vrindavan Lal Verma
इस कहानी को audio में सुनने के लिए पोस्ट के अंत में जाएँ। 85 राजा के आगरा चले जाने पर रानियाँ नरवर के क़िले में चली गई। पेशवाई सेना ने हर्ष और गर्व के साथ नगर में प्रवेश किया। ग्वालियर की बिखरी हुई फ़ौज एकत्र हो गई , उसने पेशवा को तोपों की सलामी साई और उसकी अधीनता में आ गई। पेशवा बड़े ठाठ से साथ मांगलिक वाद्य बजवाता हुआ , सिंधिया के राजमहल में पहुँचा और वहीं डेरा डाला। रानी लक्ष्मीबाई ने अपने शिविर नौलखा बाग में रक्खा। पेशवा के साथी सरदार शहर के भिन्न भिन्न महलों में जा उतरे। तात्या के के दस्ते के लिए क़िले वालों ने फाटक खोल दिए। बहुत सी सामग्री हाथ आ गई। क़िले पर पेशवा का झंडा फहराने लगा। सिंधिया का ख़ज़ाना क़ब्ज़े में आ गया। अब पेशवा के बराबर था ही कौन ? पेशवाई सेना के कम्पनी विद्रोही भाग ने रेज़िडेन्सी में आग लगाई और उसका माल असबाब लूट लिया। दीवान दिनकर राव सरदार बलवंत राव और सरदार माहुरकर की हवेलियों को भी , जो अंग्रेजों के ...